• समाज | कभी-कभार

    हिंदुत्व बहुसंख्यकतावाद, घृणा और विक्टिमहुड पर आधारित राजनीतिक अवधारणा है

    अशोक वाजपेयी

  • मनुष्य की क्रूरता पाशविक क्रूरता से कहीं अधिक व्यापक और गहरी है

    समाज | कभी-कभार

    मनुष्य की क्रूरता पाशविक क्रूरता से कहीं अधिक व्यापक और गहरी है

    अशोक वाजपेयी | 15 मई 2022

    क्या शौचालयों का न होना धरती के साथ-साथ अतंरिक्ष में भी महिलाओं के रास्ते की बाधा रहा है?

    विज्ञान-तकनीक | अंतरिक्ष

    क्या शौचालयों का न होना धरती के साथ-साथ अतंरिक्ष में भी महिलाओं के रास्ते की बाधा रहा है?

    अंजलि मिश्रा | 12 मई 2022

    भारत-चीन युद्ध : जिसके नतीजे ने जवाहरलाल नेहरू की महानता पर अमिट दाग लगा दिया

    समाज | उस साल की बात है

    भारत-चीन युद्ध : जिसके नतीजे ने जवाहरलाल नेहरू की महानता पर अमिट दाग लगा दिया

    अनुराग भारद्वाज | 12 मई 2022

    क्या एसी की टेम्प्रेचर सेटिंग 18 डिग्री पर रखने से कमरा जल्दी ठंडा हो जाता है?

    विज्ञान-तकनीक | सिर-पैर के सवाल

    क्या एसी की टेम्प्रेचर सेटिंग 18 डिग्री पर रखने से कमरा जल्दी ठंडा हो जाता है?

    अंजलि मिश्रा | 11 मई 2022

  • हमें वैष्णव जन की प्रतीक्षा है, किसी मसीहा की नहीं

    समाज | कभी-कभार

    हमें वैष्णव जन की प्रतीक्षा है, किसी मसीहा की नहीं

    अशोक वाजपेयी | 08 मई 2022

    मांसाहारी भोजन

    समाज | खान-पान

    जो मांसाहार को अहिंदू और अभारतीय मानते हैं वे इस बारे में कम जानते हैं

    अंजलि मिश्रा | 06 मई 2022

    दुनिया का नक्शा

    समाज | कभी-कभार

    हिंदी कविता में विश्व-दृष्टि क्यों नहीं दिखती?

    अशोक वाजपेयी | 01 मई 2022

    लेखक का इसरार होना चाहिए कि ‘जो स्वतंत्रता मुझे मिली है वह दूसरे सबको मिले’

    समाज | कभी-कभार

    लेखक का इसरार होना चाहिए कि ‘जो स्वतंत्रता मुझे मिली है वह दूसरे सबको मिले’

    अशोक वाजपेयी | 24 अप्रैल 2022

  • शब्द और संसार में आस्था लेखक की ‘हारी होड़’ होती है

    समाज | कभी-कभार

    शब्द और संसार में आस्था लेखक की ‘हारी होड़’ होती है

    अशोक वाजपेयी | 17 अप्रैल 2022

    क्या लता मंगेशकर ने भी गोवा की आज़ादी में अपना योगदान दिया था?

    समाज | उस साल की बात है

    क्या लता मंगेशकर ने भी गोवा की आज़ादी में अपना योगदान दिया था?

    अनुराग भारद्वाज | 17 अप्रैल 2022

    तांडव

    समाज | कभी-कभार

    दो आंखों से हम जो देखते हैं वह पर्याप्त सचाई नहीं है

    अशोक वाजपेयी | 10 अप्रैल 2022

    अब भ्रम होने लगा है कि पूरा समाज ही साहित्य को एक ग़ैरज़रूरी व्यसन मानता है

    समाज | कभी-कभार

    अब भ्रम होने लगा है कि पूरा समाज ही साहित्य को एक ग़ैरज़रूरी व्यसन मानता है

    अशोक वाजपेयी | 03 अप्रैल 2022

  • मीना कुमारी को अगर उनकी शायरी से जानो तो उनमें फैज मिलते हैं, गुलजार और गुरु दत्त भी

    समाज | पुण्यतिथि

    मीना कुमारी को अगर उनकी शायरी से जानो तो उनमें फैज मिलते हैं, गुलजार और गुरु दत्त भी

    सत्याग्रह ब्यूरो | 31 मार्च 2022

    जब मीना कुमारी पर फिल्माए गए एक अमर गीत में वे होकर भी नहीं थीं!

    समाज | पुण्यतिथि

    जब मीना कुमारी पर फिल्माए गए एक अमर गीत में वे होकर भी नहीं थीं!

    सत्याग्रह ब्यूरो | 31 मार्च 2022

    आज भी इस पूर्वाग्रह से बचना मुश्किल है कि लेखकों का शोषण घटने के बजाय बढ़ा है

    समाज | कभी-कभार

    आज भी इस पूर्वाग्रह से बचना मुश्किल है कि लेखकों का शोषण घटने के बजाय बढ़ा है

    अशोक वाजपेयी | 27 मार्च 2022

    दुनिया के ज्यादातर लोग दाएं हाथ से ही काम क्यों करते हैं?

    विज्ञान-तकनीक | सिर-पैर के सवाल

    दुनिया के ज्यादातर लोग दाएं हाथ से ही काम क्यों करते हैं?

    अंजलि मिश्रा | 20 मार्च 2022