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न मूर्तियों से गोडसे जिंदा होगा, न गोलियों से गांधी मर सकते हैं
गोडसे को चाहने वाले उसकी चाहे जितनी मूर्तियां बना लें, वे उसमें प्राण नहीं फूंक सकते. गांधी को वे चाहे जितनी गोलियां मारें, गांधी अब भी सांस लेते हैं
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वह फर्क क्या है जो न होता तो नरेंद्र मोदी और इंदिरा गांधी एक जैसे होते
शुरुआत में इंदिरा गांंधी अपने पूर्ववर्तियों की तरह ही थीं लेकिन, 1969 में कांग्रेस को तोड़ने के बाद वे बदल गईं
Jun 19, 2020
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